जख्म 25 शायरी हिंदी में
1: जख्मों के बावजूद मेरा हौसला तो देख तू हँसी तो मैं भी तेरे साथ हँस दिया।।
2: मैं हँसकर अपना दर्द सुनाऊंगा तुम रो भी नही पाओगे मेरे जख्मों को आज कुरेदे गर तुम सो भी नही पाओगे।
3: बैठ कर उदास लम्हों में ये सोचता हूँ दुश्मनी भी नही किसी से फिर जख्म गहरे क्यों हुए।।
4: तुमने तीर चलाया तो कोई बात न थी जख्म मैंने जो दिखाया तो बुरा मान गए।
5: मरहम की जरूरत नही है मुझे जख्म देकर कम से कम हाल तो पूछ लिया करो।
6: मेरी चाहत को मेरे हालात के तराजू में कभी मत तोलना मैंने वो जख्म भी खाए है, जो मेरी किस्मत में नहीं थे।
7: अब ना जी रहा हूं ना मर रहा हूं जख्मों को याद
कर बस रो रहा हूं।
8: आज भी तेरी यादों का पहरा है जख्मों का दर्द बड़ा ही गहरा है।
9: जख्म कोई दूसरा देता तो घाव भर ही जाता है पर कोई अपना जख्म दे तो जख्म सदा हरा रहता है।
10: सागर का खारापन क्या कम था जनाब अब ये आसूं भी जख्मों पर गिरने लगें।
11: ये बेपनाह इश्क मेरी जान लिए जा रहा है अजीब यार है बस जख्म दिए जा रहा है।
12: महबूब आज मुझ पर ये करम कर गया पुराने जख्मों को सारे फिर से हरा कर गया।
13: दे गया वो जख्म मुझें ऐसा जिसकी ना फिर कोई दवा लगी नासूर की तरहा बढ़ता गया जब-जब उसकी यादों की हवा लगी ।
14: मुझे मिला जो दर्द उसे तुम खत्म कर दो अपने प्यार से मेरे दिल के जख्म भर दो।
15: जख्म भरता नहीं है मरहम लगाने से दर्द बढ़ता ही जाता है तेरी याद आने से।
16: नए जख्म दर्द लगता है फिर से मिलने जा रहे हैं जिदगी में प्यार करने वाले लोग फिरसे आ रहे हैं।
17: हमें धोखा देना बेवफाई करना आता नहीं सच्चा इश्क कभी जख्म देना सिखाता नहीं।
18: मेरे सर पर हाथ रख वो झूठी कसमे खाती थी वो हर रोज एक नया जख्म देकर जाती थी।
19: तू भी तड़पे मेरी तरह इश्क में तेरा दर्द-ए-दिल ना रुक पाए कोई करे धोखा तेरे साथ फिर बेवफाई का जख्म ना भर पाए।
20: मुस्कराहट यूँ ही मेरे दिल के जख्मों को छुपा लेती है जैंसे माँ अपने बच्चों की खूबियों को सबसे छुपा लेती है।
21: काश बनाने वाले ने दिल कांच का बनाया होता तोड़ने वाले के हाथ में ज़ख्म तो आया होता।
22: कुछ रूठे हुए लम्हें कुछ टूटे हुए रिश्ते हर कदम पर काँच बन कर जख्म देते हैं।
23: जिंदगी में कुछ गहरे जख्म कभी नहीं भरते इन्सान बस उन्हें छुपाने का हुनर सीख जाता है।
24: जख्म तो आज भी ताजा है बस वो निशान चला गया मोहब्बत तो आज भी बेपनाह है बस वो इंसान चला गया।
25: कुछ जख्म अंदर तक तोड़ जाते हैं भर तो जाते हैं पर निशाँ छोड़ जाते हैं।
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