26 जुदाई शायरी हिंदी में
1: कितनी राते बिता दी तुम्हारे बिना कितने दिन बिता दिए तुम्हारे बिना अब तक समय जो बीता सो बीता पर जिंन्दगी नहीं बितानी तुम्हारे बिना।
2: अपने साथ से मुझे मुकम्मल कर दो खुद को मेरी बाहों में भर दो तुम-तुम ना रहो मैं-मैं ना रहू ऐसी खूबसूरत जिंन्दगी का वादा कर दो।
3: सब के होते हुए भी तन्हाई मिलती है यादों में भी गम की परछाई मिलती है जितनी भी दुआ करते हैं किसी को पाने की उतनी ही ज्यादा जुदाई मिलती है।
4: कल तक हमसे बात किये बिना जिसे नींद तक नहीं आती थी आज हमसे बात करने का वक्त नहीं उसके पास।
5: अगर मुझसे मोहब्बत नहीं तो रोते क्यों हो तन्हाई में मेरे बारे में सोचते क्यों हो अगर मंजिल जुदाई है तो जाने दो मुझे लौट के कब आओगे पूछते क्यों हो।
6: सर्द रातों में सताती है जुदाई तेरी आग बुझती नहीं सीने में लगाई तेरी तू तो कहता था बिछड़ के सुकून पा लेंगे फिर क्यों रोती है मेरे दर पे तन्हाई तेरी।
7: मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है ये तो जरूरी नहीं कि वो बेवफा होता है देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है।
8: मैं एक अरसे से उसका दिल जीतने में लगा था और वो जाते जाते अपना दिल हारकर चली गई।
9: प्यार ना करना किसी से सहन नहीं होगा जुदा हो गये तो फिर जीने का मन नहीं होगा।
10: आपकी सोहबत में हम चिरागों की तरह जला करते थे आप थे तो रौशनी रोज हुआ करती थी।
11: लम्हे जुदाई को बेकरार करते हैं हालत मेरे मुझे लाचार करते हैं आँखे मेरी पढ़ लो कभी,हम खुद
कैसे कहे की आपसे प्यार करते हैं।
12: जब वादा किया है तो निभाएंगे सूरज किरण बन कर छत पर आएंगे हम हैं तो जुदाई का गम कैसा तेरी हर सुबह को फूलों से सजाएंगे ।
13: कलम चलती है तो दिल की आवाज लिखता हूँ गम और जुदाई के अंदाज-ए-बयां लिखता हूँ रुकते नहीं हैं मेरी आँखों से आंसू मैं जब भी उसकी याद में अल्फाज लिखता हूँ।
14: उनके सीनो में कभी झांक कर तो देखो तो सही कितना रोते हैं तन्हाई मैं औरों को हंसाने वाले।
15: मुझे मिली जुदाई तो मैं क्या करूँ ना मोहब्बत रास आई तो मैं क्या करूँ ना मुझे उम्मीद है अब जीने की
ना मुझे आई मौत तो मैं क्या करूँ।
16: तेरी जुदाई भी हमें प्यार करती है तेरी याद बहुत बेकरार करती है वह दिन जो तेरे साथ गुजारे थे नजरें तलाश उनको बार-बार करती है।
17: तू क्या जाने क्या है तन्हाई इस टूटे दिल से पूछो क्या है जुदाई बेवफाई का इलजाम न दे जालिम इस वक्त
से पूछो किस वक्त तेरे याद न आई।
18: दिल से निकली ही नहीं शाम जुदाई वाली तुम तो कहते थे बुरा वक्त गुजर जाता है।
19: किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो जिस्म से रूह को लेने फरिश्ते नहीं आते।
20: अब जुदाई के सफर को मेरे आसान करो तुम मुझे ख्वाब में आकर न परेशान करो ।
21: तू क्या जाने क्या है तन्हाई इस टूटे दिल से पूछो क्या है जुदाई बेवफाई का इलजाम न दे जालिम इस वक्त से पूछो किस वक्त तेरे याद न आई।
22: जुदा हो कर भी जी रहे है मुद्दत से कभी केहते थे दोनों कि जुदाई मार डालेगी।
23: कट ही गई जुदाई भी कब ये हुआ कि मर गए तेरे भी दिन गुजर गए मेरे भी दिन गुजर गए।
24: उसकी जुदाई में आज यादें तड़पाती है याद में उसकी अब तो रातें गुजर जाती है।
25: ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में ।
26: मौत तो सच्चाई है आनी ही है लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज मरता है कोई ।
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